To angry ones out there.

Anger is something when you give punishment to yourself for mistakes of others .

Yes sometimes people screw you over and you feel like shouting at them and in the end you end up crying. So whenever you feel like shouting at someone just relax and think whether this thing will matter after 5 years or not .

And if it is insignificant just don’t waste your time in energy. 

Sometime it’s not anger, you are hurt sometimes .It is like you feel betrayed and cheated. It’s then when you should tell yourself that the world is full of morons and you don’t always get what you give .

Just be calm and think even if you didn’t get what you expected at least you gave it to them , and your good is bound to get back to you. The more you give the more you get. It comes back to you in some form or the other.

 No words can grant you peace ,but you yourself can and this is real Redemption ,forgive the ones who haven’t asked for it .Just don’t repeat the sequence in your brain again and again because in the end you curse yourself for not doing such things not not saying this or that .Discover yourself a Calming exercise like writing ,reading, eating chocolates ,just busting out in front of some close friend etc.

Remember no matter how much restless you are right now, it will end and things you do will remain forever.

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जब कभी याद आएगी।


सफर तो यूँ ही कट जाता है साथ चलते चलते,

तकलीफ तो साथ चलने वालों के यादे देते हैं।

वक़्त कभी लौटता नहीं,

और यादें कभी जाती नहीं।

यादों का भी अलग दस्तूर है,

जब बनती हैं , तो दिखती नहीं,

और जब दिखती हैं , तो बन सकती नहीं।
जब कभी याद आएगी,

याद आएगी क्योंकी वो तो कभी जाती नहीं ना ।

तो सरदी की धूप में तुम्हे ढूँढ लुँगी,

ढन्डी हवाओं में तुम्हें महसूस कर लुँगी,

बारिश में शायद तुम्हें पा लूँ इस उम्मीद में भीग लुँगी,

चाय भी शायद अब पी ही लूँ ।

शाम छहः बजे ही घर को चल दूँगी,

नल में पानी देख हैरान हो लुँगी,

15 और 30 तारिख को छोले भटूरे खा लुँगी।
जब कभी याद आएगी,

याद आएगी क्योंकी वो तो कभी जाती नहीं ना ।

तो ये सोच कर खुश हो लेना , की ये सबको आती है,

ये किसी से भी दुर नहिं जाती।

ये जान लो ,ये यादें 

हौसला हैं ,

हर पल में कुछ और जीने का।

हीम्मत हैं,

अपनी बाते कहने की।

ताकत हैं,

हर चीज में खूबसूरती देखने की।
जब कभी याद आएगी,

याद आएगी क्योंकी वो तो कभी जाती नहीं ना ।

तो मुस्कूरा लेना, खिलखिलाकर हँस लेना

क्योंकि रोने को जींदगी में गम बहुत हैं,

हम गए नहीं है, देखो हमारी याद तो अभी भी तुम्हारे पास है।

क्योंकि याद तो कभी जाती नहीं।
वक्त शायद अब खत्म होने वाला है,

पर यादें तो हमेशा साथ है।
जब कभी याद आएगी,

याद आएगी क्योंकी वो तो कभी जाती नहीं ना ।

तो चॉकलेट पूरी खुद ही खा लेना,

पुरे कमरे में हुड़दंग मचा लेना,

जोर से चीख लेना,

जो सूकुन दे वो कर लेना,

क्योंकि याद तो आएगी,

वो कभी जाती नहीं ना।

fearless

All the fear is just in your mind.

It grips you until you let it,

Fearless isn’t brainless

If I am not afraid of lion,

Doesn’t mean I would sit on one.

I don’t fear you ,

Doesn’t means I would smash you.

Being fearless is like being selfless ,

And brainfull at the same time.

So, to everyone out there be fearless

But not brainless.

क्या लड़की एक कठपुतली है?

क्या लड़की एक कठपुतली है?

नाच तो सकती है ,पर क्या केवल समाज के इशारो पर?

और कया वह केवल नाचने के लिए ही बनी है?

क्या लडकी एक कठपुतली है?
क्यों उसका अपना नाम नही है ,

 क्यों उसका अस्तित्व खतरे में है।

क्या उसका अपना कुछ भी नहीं ?

क्या  लडकी एक कठपुतली है?
हाँ , समझता है ये समाज उसे एक कठपुतली।

खाता है उसी के हाथ कि रोटियाँ,

पर देता है समाज उसे अपनी कूटनितियाँ।
माँ,बहन,बेटी को तो सब सहेज लेंगे 

पर जिसे छेडा गलियारों में 

वो भी तो होंगी किसी कि माँ,बहन, और बेटियां

जब धन,लक्षमी और सौभाग्य ही लडकी है

तो क्यों इन्हीं के लिए वो बिकती है?
समाज के प्रधान होंगें कई

पर न जाने लडकियों को बचाने नहिं आता कोई?

क्यों कम पड जाते हैं हाथ?

क्यों मोड लेते हैं मुँह?

क्यों झुक जाती है नजरे ?

क्या  लडकी एक कठपुतली है?