क्या लड़की एक कठपुतली है?

नाच तो सकती है ,पर क्या केवल समाज के इशारो पर?

और कया वह केवल नाचने के लिए ही बनी है?

क्या लडकी एक कठपुतली है?
क्यों उसका अपना नाम नही है ,

 क्यों उसका अस्तित्व खतरे में है।

क्या उसका अपना कुछ भी नहीं ?

क्या  लडकी एक कठपुतली है?
हाँ , समझता है ये समाज उसे एक कठपुतली।

खाता है उसी के हाथ कि रोटियाँ,

पर देता है समाज उसे अपनी कूटनितियाँ।
माँ,बहन,बेटी को तो सब सहेज लेंगे 

पर जिसे छेडा गलियारों में 

वो भी तो होंगी किसी कि माँ,बहन, और बेटियां

जब धन,लक्षमी और सौभाग्य ही लडकी है

तो क्यों इन्हीं के लिए वो बिकती है?
समाज के प्रधान होंगें कई

पर न जाने लडकियों को बचाने नहिं आता कोई?

क्यों कम पड जाते हैं हाथ?

क्यों मोड लेते हैं मुँह?

क्यों झुक जाती है नजरे ?

क्या  लडकी एक कठपुतली है?

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